आज जिस धरती पर हम खड़े हैं जहां हम अपनी सुख सुविधाओं का आनंद ले रहे है वह हमेशा से ऐसी नही थी । जिस जमीन पर आप अपना घर बनाए बैठे है वह कभी हजारों डिग्री तापमान पर उबलता हुआ लावा था और कभी हजारों मीटर मोटी बर्फ के चादर के नीचे दबी हुई एक निर्जीव चटान। विज्ञान के अनुसार हमारी पृथ्वी का इतिहास लगभग 450 करोड़ साल पुराना है यह सफर केवल समय का बितना नही बल्कि संघर्ष, विनाश, पुनर्जन्म ओर क्रमिक विकास की ऐसी दास्तां है जिस सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते है आज इस ब्लॉग में हम समय की गहराइयों में उतर कर देखेंगे कि कैसे अंतरिक्ष की धूल की छोटी – छोटी कणों से मिलकर उस नीले ग्रह का रुप लिया जिसे आज हम अपना घर कहते है।
इस ब्लॉग में पृथ्वी बनने के दौरान महत्वपूर्ण घटनाएं कुछ इस प्रकार से समझेंगे –
1). सौरमंडल की उत्पत्ति। 2). पृथ्वी का निर्माण। 3). चंद्रमा की जन्म। 4). महासागरों का निर्माण । 5). ऑक्सीजन की उत्पत्ति। 6). पृथ्वी का बर्फ से जमना। 7). डायनासोर का युग। 8). महाविनाश एक युग का अंत। 9). मानव प्रजाति का उदय। 10). आधुनिक युग और भविष्य की चुनौतियां।
1). सौरमंडल की उत्पत्ति कैसे हुई? ( 700 – 450 करोड़ साल पहले )
हमारी पृथ्वी की शुरुआत आज से करीब 700 करोड़ साल पहले होती है । उसे समय आज जहां हमारा सौरमंडल स्थित है वहां केवल गैस और धूल की विशाल बादल हुआ करते थे । इन बादलों को नेबुला कहा जाता है । वैज्ञानिकों का मानना है कि इन बादलों के पास विशाल तारा हुआ करता था जिसकी ऊर्जा समाप्त हो रही थी । जब उसे तारे में भयानक विस्फोट ( supernova ) हुआ तो उस से निकली शॉकवेव्स ने धूल और गैस के इन बादलों को आपस में टकराने के लिए मजबूर कर दिया । इस टकराव और दबाव के कारण अंतरिक्ष के ये कण एक केंद्र की ओर खींचने लगे । अत्यधिक दबाव और घर्षण ने गर्मी पैदा की और केंद्र में हाइड्रोजन और हीलियम जैसे गैस जमा होने लगी। अंततः एक और विशाल विस्फोट हुआ और हमारे सूर्य का जन्म हुआ। सूर्य के जन्म के बाद जो धूल और चट्टानें बच गई वे सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण उसके चारों ओर चक्कर लगाने लगी । यही धूल के कण आगे चलकर ग्रहों के निर्माण की नींव बने ।

2). पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ? ( 459 करोड़ साल पहले )
सूर्य के चारों ओर घुम रहे पत्थर और क्षुद्रग्रह ( Asteroid ) आपस में टकराने लगे । गुरुत्वाकर्षण के कारण इन छोटे – छोटे टुकड़ों को जोड़कर बड़े पिंडों का निर्माण किया। इस प्रक्रिया में बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल जैसे चट्टान ग्रहों का निर्माण हुआ । प्रारंभिक पृथ्वी आज की तुलना में बिल्कुल विपरीत थी । यहां न हवा थी, न पानी और न ही जीवन थी। उस समय पृथ्वी का तापमान लगभग 1900 डिग्री सेल्सियस था । यह पिघले हुए लावे का एक नर्क जैसा दिखने वाला गोला था। पृथ्वी पर होने वाले लगातार ज्वालामुखी विस्फोटों और अंतरिक्ष से गिरने वाले उल्कापिंडों ने इसे एक दहकता हुआ आग का मैदान बना दिया था।

3). थिया के साथ टक्कर और चंद्रमा का जन्म ( 453 करोड़ साल पहले )
पृथ्वी के शुरुआती दिनों में एक, एक और नवजात ग्रह जिसका नाम थिया ( Theia ) था वह भी उसी कक्षा में सूर्य के चक्कर लगा रहा था। थिया का आकार लगभग आज के मंगल ग्रह के बराबर था। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण ने थिया को अपनी ओर खींचा और दोनों के बिच में एक ऐसी टक्कर हुईं जिसने सब कुछ बदल दिया। यह टक्कर इतनी भयानक थी कि थिया पुरी तरह से नष्ट हो गया और पृथ्वी का एक बड़ा हिस्सा पिघलकर अंतरिक्ष में बिखर गया। पृथ्वी की चारों ओर मलबे और धूल के छल्ले ( Rings ) बन गए जैसे हम आज शनि ग्रह के चारों ओर देखते है। करोड़ों सालों में यही मलबा गुरुत्वाकर्षण के कारण इकठ्ठा होने लगा जिससे हमारे चंद्रमा ( moon ) का जन्म हुआ । चंद्रमा का जन्म पृथ्वी के लिए वरदान साबित हुआ क्योंकि इसने पृथ्वी की धुरी को स्थिर किया और ऋतुओं ( seasons ) के निर्माण में मदद की।

4). महासागरों का निर्माण और जीवन कि पहली किरण ( 400 – 350 करोड़ साल पहले )
चंद्रमा के बनने के बाद भी पृथ्वी शांत नहीं हुई थी। लाखों सालों तक अंतरिक्ष से उल्कापिंडों कि भारी वर्षा होती रही इन उल्कापिंडों के भीतर नमक,खनिज और सबसे महत्वपूर्ण चीज पानी के अनु ( water Molecules ) छिपे थे । करोड़ों सालों की इसी निरंतर बमबारी के कारण पृथ्वी पर पानी जमा होने लगा और विशाल महासागरों का निर्माण हुआ। पानी के आने के बाद समुद्र के गहराईयों में स्थित ज्वालामखियों के पास पहली बार जीवन की सुगबुगाहट शुरू हुई। अत्याधिक गर्मी और रसायनों के मिश्रण से पहले एक कोशिकीय जीव ( Microbes ) पैदा हुए । ये जीव पृथ्वी के पहले निवासी थे, जिन्होंने बिना ऑक्सीजन के जीवित रहना सिखा था।
5). ऑक्सीजन का जन्म कैसे हुआ? ( 250 करोड़ साल पहले )
आज से लगभग 250 करोड़ साल पहले, समुद्र के कुछ सूक्ष्म जीवों ( जैसे साइनबैक्ट्रिया ) ने सूर्य की रोशनी और पानी का उपयोग कर के भोजन बनाना शुरू किया । इस प्रक्रिया को हम प्रकाश संश्लेषण ( photosynthesis ) कहते है। इस प्रक्रिया के उप – उत्पाद ( Byproduct ) के रूप में ऑक्सीजन निकलने लगी। शुरुआत में यह ऑक्सीजन समुद्र मौजूद लोहे ( Iron ) के साथ मिली, जिससे पृथ्वी कि चट्टानें लाल हो गई। लेकिन धीरे – धीरे ऑक्सीजन वातावरण में फैलने लगी । ऑक्सीजन कि अधिकता ने ओजोन परत ( Ozone layer ) का निर्माण किया। ओजोन परत ने सूर्य की जानलेवा पराबैंगनी ( UV ) किरणों को रोकना शुरू किया जिससे जीवन के लिए समुद्र से बाहर निकलकर जमीन पर आना संभव हो पाया।

6). स्नोबॉल अर्थ क्या है? ( 80–65 करोड़ साल पहले )
पृथ्वी का इतिहास केवल गर्मी का ही नहीं रहा है। कई बार टेक्टॉनिक प्लेटों की हलचल और कार्बन डाइऑक्साइड की कमी के कारण पृथ्वी का तापमान इतना गिर गया कि पूरा ग्रह बर्फ की एक गेंद की तरह दिखने लगा इस प्रक्रिया को स्नोबॉल अर्थ ( snowball earth ) कहा जाता है। हजारों सालों तक पृथ्वी बर्फ की हजारों मीटर मोटी बर्फ की चादरों लिपटी रही अधिकांश जीवन नष्ट हो गया लेकिन कुछ जीव गर्म झरनों और समुद्र की गहराइयों में जीवित बचे रहे। अंततः पृथ्वी के भीतर की गर्मी ने ज्वालामुखियों के माध्यम से गैसे बाहर छोड़ी जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा हुआ और बर्फ पिघलनी शुरू हुई।

7). डायनासोर का युग ( 25 – 6.5 करोड़ साल पहले )
बर्फ पिघलने के बाद पृथ्वी में जीवन में बहुत तेजी से विकास हुआ । समुद्र में जटिल जीव विकसित हुए मछलियां रीढ़ की हड्डी वाले जानवर और धीरे – धीरे उभयचर ( Amphibians ) जो पानी और जमीन दोनो जगह अपना जीवन बिता सकते थे । लगभग 25 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर डायनासोर का उदय हुआ । यह वह समय था जब पृथ्वी पर सभी महाद्वीप आपस में जुड़े हुए थे जिसे पेंजिया ( Pangea )कहा जाता था । डायनासोरों ने लगभग पृथ्वी पर 16 – 17 करोड़ सालों तक पृथ्वी पर राज किया । इस दौरान विशालकाय जीव और घने जंगलो ने पृथ्वी की सूरत ही बदल दी थी ।

8). महाविनाश : एक युग का अंत ( 6.5 करोड़ साल पहले )
आज से लगभग 6.5 करोड़ साल पहले मैक्सिको के पास एक विशाल उल्कापिंड ( asteroid ) टकराया । इसकी टक्कर इतनी शक्तिशाली थी कि इसने पृथ्वी के वातावरण को धूल और राख से भर दिया जिससे सालों तक सूर्य की रोशनी जमीन तक नहीं पहुंच पाईं । डायनासोर भोजन की कमी और जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी तरह से विलुप्त हो गये । लेकिन इस विनाश में स्तनधारियों ( mammals ) के लिए एक मौका छिपा था । डायनासोरों के जाने के बाद छोटे स्तनधारी जीव अपने बिलों से बाहर निकलने लगे और विकसित होने लगे।
9). मानव का उदय: बंदर से विचारक तक ( 40 लाख साल पहले से आज तक )
पिछले 40 साल लाखों में अफ्रीका के जंगलों में रहने वाले कुछ बंदरों ( Apes ) ने दो पैरों पर खड़ा होना और चलना सीखा । जलवायु परिवर्तन के कारण जंगल कम हो गये थे इसलिए उन्हें भोजन की तलाश में मिलों पैदल चलना पड़ता था । धीरे – धीरे उनके मस्तिष्क का आकार बढ़ा । उन्होंने पत्थर के औजार बनाना, पत्थरों को आपस में रगड़कर आग़ जालना और उसका उपयोग करना और बातचीत के लिए भाषा का विकास करना सीख लिया। लगभग 2 लाख साल पहले होमो सेपियंस ( homo sapiens ) यानी आधुनिक मानव का उदय हुआ । हमने खेती की शुरुआत की, शहरों का किया और अंततः और विज्ञान और तकनीक के दम पे अंतरिक्ष तक जा पहुंचे।

10). आधुनिक युग और विषय की चुनौतियां ।
पृथ्वी के 450 करोड़ साल के इतिहास में , मानव का अस्तित्व पलक झपकने जितना छोटा है लेकिन इस छोटे समय से समय में हमने पृथ्वी को जितना बदला है उतना पहले कभी भी नहीं हुआ है । औद्यौगिक क्रांति के बाद से हमने जीवाश्म ईंधन ( Fossil fuels ) जलाकर वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड कि मात्रा बहुत बढ़ा दी है जिससे ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का ख़तरा पैदा हो गया है । वैज्ञानिकों का मानना है कि हम पृथ्वी के छठे सामूहिक विनाश ( sixth Mass Extinction ) की कगार पर खड़े हैं । अगर हमने समय रहते अपने जीवनशैली और उर्जा के स्रोतों नहीं बदला तो पृथ्वी का भविष्य संकट में पड़ जाएगा ।
निष्कर्ष: हमारा एकमात्र घर ।
पृथ्वी की यह 450 करोड़ साल की यात्रा हमें सिखाती है कि यह ग्रह कितना लचीला और साथ ही कितना संवेदनशील भी है । आग, बर्फ़, टक्कर और विनाश के बाद भी इसने जीवन को पनपने का मौका दिया । हम भाग्यशाली है कि हम इस ग्रह के इतिहास के उस पड़ाव पर है जहां हमारे पास इसे समझने और बचाने की शक्ति है । पृथ्वी केवल एक चट्टान का टुकड़ा नहीं है यह एक जीवित सांस लेता हुआ तंत्र है। इसकी कहानी अभी समाप्त नहीं हुई है और यह उन सभी मानव जनजाति पर निर्भर करती है कि अगले हजारों लाखों सालों के इतिहास में मानव प्रजाति का नाम एक रक्षक के रूप में लिखा जायेगा या एक विनाशक के रुप में।
धन्यवाद!
नोट — : इन सभी 10 टॉपिक को एक – एक कर के हमलोग अगले ब्लॉग ( Article ) में डिटेल्स से समझेंगे ।