सौरमंडल का जन्म कैसे हुआ?

ब्रह्मांड में अरबों तारे और गैलक्सी मौजूद है, लेकिन हमारे लिए सबसे विशेष हमारा अपना सौरमंडल है। हमारा सौरमंडल आज से लगभग 4.571 अरब साल पहले अस्तित्व में आया था। आज हम जिस शांत और व्यस्थिति सौरमंड को देखते है उसका इतिहास बहुत ही हिसंक, गतिशील और विनाशकारी रहा है । आज के इस ब्लॉग ( Article ) में हम सौरमंडल के जन्म की पुरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक की नजरों से समझेंगे ।

नोट ( NOTE ) : — सौरमंडल को बनने में अलग–अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा। इस प्रक्रिया को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझेंगे।

( 1. ) नेबुलर परिकल्पना ( The nebular hypothesis )

सौरमंडल के बनने की शुरुआत कैसे हुई? वैज्ञानिकों के पास इसका सबसे सटीक उत्तर नेबुलर परिकल्पना है। इस सिद्धांत के अनुसार अंतरिक्ष में गैस और धूल का एक बहुत बड़ा और ठंडा बादल मौजूद था, जिसे नेबुला ( nebula ) कहा जाता है। यह बादल मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना था। लेकिन इसमें केवल गैसे नही थीं बल्कि पत्थर, धातु, पानी और मीथेन जैसे बर्फ के कण और कुछ जटिल कार्बनिक अनु भी मौजूद थे। यह बादल इतना विशाल था कि इसका व्यास कई प्रकाश वर्ष ( light years) तक फैला हुआ था।

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(The nebular hypothesis )

( 2. ) वह एक झटका जिसने सब कुछ बदल दिया ( The supernova )

सुपरनोवा किसे कहते है ? गैस और धूल का यह बादल अरबों सालों तक वैसा ही पड़ा रह सकता था लेकिन एक बाहरी घटना ने इसे सक्रिय कर दिया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बादल के पास किसी विशाल पुराने तारे की मृत्यु हुई जिससे एक धमाका हुआ जिसे सुपरनोवा ( supernova ) कहते है। इस धमाके से निकली शॉकवेव्स ( shockwave ) जब हमारे नेबुला से टकराई तो उसने बादल के अंदर हलचल पैदा कर दी। गुरुत्वाकर्षण ( Gravity ) के कारण बादल के कण आपस में सिमटने लगे। बादल घूमने लगा और जैसे – जैसे यह केंद्र की ओर सिमटने लगी इसकी इसकी घूमने की गति बढ़ती गईं जैसे एक आटा गूंथने वाली चकरी घूमते हुए चपटी हो जाती है वैसे ही यह बादल एक विशाल चपटी डिस्क ( Accretion disk ) में बदल गया।

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( The supernova )

( 3. ) सूर्य का जन्म कैसे हुआ?

डिस्क के बिल्कुल अंदर में जहां दबाव और गर्मी सबसे अधिक थी बहुत सारा द्रव्यमान ( Mass ) इकट्ठा हो गया। यहां एक प्रोटोस्टार ( Protostar ) का जन्म हुआ जो आगे चलकर हमारा सुर्य बना। शुरुआती दौर में सूर्य आज के जैसा नहीं था इसे टी – टॉरी ( T–tauri ) चरण कहा गया । उस समय सुर्य से बहुत शक्तिशाली उर्जा और लहरें निकल रही थीं जिन्होंने सौरमंडल के आसपास कि बची हुईं हल्की गैसों को बाहरी हिस्सों की तरफ धकेल दिया इसी वजह से सूर्य के पास के ग्रह पथरीले बने और दूर के ग्रह गैसीय बने।

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The protostar L1527, shown in this image from the NASA/ESA/CSA James Webb Space Telescope.

( 4. ) धूल से कंकड़ और कंकड़ से पत्थर ( The Process of Accretion )

जब केंद्र में सूर्य बन रहा था तब उसके चारों ओर घुम रही डिस्क में धूल के अरबों कण आपस में टकरा रहे थे। स्टैटिक इलेक्ट्रक्सिटी के कारण ये कण आपस में चिपकने लगे। धीरे – धीरे ये कण कंकड़ बनने लगे और फिर बड़े पत्थर का रूप लेने लगे जिन्हें बाद में प्लैनेटेसिमल्स ( Planetesimals ) कहा जाता है। ये पत्थर एक दूसरे को अपने गुरुत्वाकर्षण से खींचने लगे और बड़े होते गए जिससे ग्रहों की भ्रूण ( planetary Embryos ) बने।

( 5. ) बर्फीले रेखा का महत्व ( The Snow Line )

सौरमंडल के विकास में बर्फीले रेखा ( Snow Line ) की योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण थी। सूर्य से लगभग 5 खगोलीय इकाई (Astronomical Unit) कि दूर एक सीमा थी। अंदर का हिस्सा:– यहां गर्मी इतनी अधिक थी की पानी या गैस जम नहीं सकते थे। यहां केवल लोहा और पत्थर ही ठोस रह पाए इसलिए यहां बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल जैसे छोटे पथरीले ग्रह बने। बाहर का हिस्सा:– यहां तापमान इतना कम था की पानी, मीथेन और ओमनिया जैसी गैसे बर्फ बन गई। इस बर्फ के कारण यहां ग्रहों को बढ़ने के लिए बहुत सारा कच्चा माल मिल गया।

( 6. ) बृहस्पति:– सौरमंडल का पहला विशाल ग्रह।

सौरमंडल का सबसे पहला ग्रह बृहस्पति ( Jupiter ) को माना जाता है। स्नो लाइन के ठीक बाहर बनने के कारण इसे डिस्क की अधिकांश गैस और धूल को सोखने का मौका मिल गया। मात्र कुछ ही लाख वर्षो में बृहस्पति पृथ्वी से 300 गुना भी ज्यादा भारी हो गया। इसके बाद शनि ( Saturn ) बना जिसे बृहस्पति से बची –खुची गैस मिली इसलिए यह थोड़ा छोटा रह गया।

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This visible-light image of Jupiter was created from data captured on 11 January 2017 using the Wide Field Camera 3 on the Hubble Space Telescope. Near the top, a long brown feature called a ‘brown barge’ extends 72,000 kilometers (nearly 45,000 miles) in the east-west direction. The Great Red Spot stands out prominently in the lower left, while the smaller feature nicknamed Red Spot Jr. (known to Jovian scientists as Oval BA) appears to its lower right.

( 7. ) विशाल ग्रहों का विस्थापन ( Planetary Migration )

शुरुआत में हमारे सौरमंडल के चार विशाल ग्रह ( बृहस्पति, शनि, युरेनस ओर नेप्चून ) आज की तुलना में सूर्य के बहुत करीब थे। लेकिन समय के साथ उनके बीच गुरुत्वाकर्षण का युद्ध शुरू हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार नाइस मॉडल ( Nice Model ) के बृहस्पति और शनि के बीच एक खास तालमेल ( Orbital Resonance ) बना जिससे एक जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण खिंचाव पैदा हुआ। इस खिंचाव ने युरेनस और नेप्चून को सौरमंडल के बाहरी कोणों की तरफ उछाल दिया। इसी उथल – पुथल ने सौरमंडल के कचरे ( बर्फ और पत्थर ) को किनारे पर धकेल दिया जिससे क्यूपर बेल्ट ( kuiper belt ) और ऊर्जा ऊर्ट क्लाउड ( oort cloud ) का निर्माण हुआ।

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( 8. ) पथरीले ग्रह :—

आंतरिक सौरमंडल में भी शांति नहीं थी यहां लगभग 50 से 100 छोटे – छोटे ग्रहों के भ्रूण ( Embryos ) आपस में टकरा रहे थे । बुध ( Mercury ) माना जाता है कि बुध एक समय में बहुत बड़ा ग्रह रहा होगा लेकिन एक विशाल टक्कर ने इसकी ऊपरी परत उड़ा दी जिससे आज इसके पास केवल एक बड़ा धात्विक कोर बचा हुआ है। पृथ्वी और चंद्रमा कई टक्करों से गुजरकर बनी। चंद्रमा का जन्म भी एक बड़ी टक्कर ( Theia Collision ) का परिणाम माना जाता है।

( 9. ) भारी बमबारी ( heavy bombardment )

जब विशाल ग्रह विस्थापित हो रहे थे तो उन्होंने लाखों धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों को आंतरिक सौरमंडल की ओर भेज दिया । लगभग 400 मिलियन वर्षों तक पृथ्वी, मंगल और शुक्र पर इन बर्फीले पथरों की बरसात हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के महासागरों में जो पानी आज हम देखते है वह इन्हीं बर्फीले धूमकेतुओं के टकराने से आया है।

( 10. ) तीन नीले ग्रह और उनका भाग्य ( Earth,Venus,Mars )

शुरुआत में सौरमंडल में केवल पृथ्वी ही निली थी। शुक्र और मंगल पर भी पानी के महासागर थे लेकिन उनका भाग्य अलग रहा:— मंगल ( Mars ) मंगल पृथ्वी से छोटा है इसलिए इसका कोर जल्दी ठंडा हो गया। इसका चुंबकीय क्षेत्र खत्म हो गया जिससे सूर्य की किरणों ने इसके वायुमंडल को खत्म कर दिया और पानी सुख गया। शुक्र ( Venus ) :— यह सूर्य के बहुत करीब था। यहां गर्मी इतनी बढ़ गई कि पानी भाप बनकर उड़ गया। ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण आज सौरमंडल का सबसे नरक जैसा गर्म ग्रह है। पृथ्वी ( Earth ) :— केवल पृथ्वी ही सूर्य से सही दूरी पर है। इसका चुंबकीय क्षेत्र और वायुमंडल आज तक बरकरार है जिससे यहां जीवन पनप सका।

निष्कर्ष:— हमारा सौरमंडल आज हमें जितना स्थिर और शांत दिखता है इसकी उत्पति उतना ही उथल – पुथल और चमत्कारी रही है। धूल के छोटे कणों से शुरू हुआ यह सफर विशाल ग्रहों के टकराव और विस्थापन से होता हुआ पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति तक पहुंचा है। हम एक बहुत ही दुर्लभ और विशेष समय में जी रहे है जहां ब्रह्मांड सारी परिस्थितियां हमारे साइड में है । सौरमंडल का इतिहास हमें सीखता है कि परिवर्तन ही ब्रह्मांड का एकमात्र नियम है। आज से अरबों साल बाद जब सूर्य का ईंधन खत्म होगा तो यह कहानी फिर एक नए रूप में शुरू होगी।

धन्यवाद्

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